उज्जैन।एक पखवाडे के दौरान उज्जैन जिले के बडनगर तहसील अंतर्गत झलारिया गांव में ट्यूबवेल में गिरने से राजस्थान के पाली जिला निवासी ढाई वर्षीय भागीरथ पिता प्रवीण उर्फ पंसाराम की मौत हो गई थी। इस मामले में संभाग के जिलों का प्रशासन एक्शन मोड में है। जिलों में माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।दैनिक अवंतिका ने अपने 13 अप्रेल के अंक में हादसों पर संभाग के सभी जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। इसमें मधुमक्खियों के हमले से हुए हादसे एवं बडनगर में ट्युबवेल में गिरे बच्चे का हादसा दोनों मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया गया था।संभाग के जिलों में इस पर ध्यान देते हुए सख्ती के साथ पालन की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।मंदसौर : लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई-मंदसौर जिला प्रशासन ने इस मामले पर गंभीरता दिखाई है। अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल ने बताया कि बोरवेल सुरक्षा संबंधी माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। जिले में निर्देश दिए हैं कि जिले में सभी बंद पड़े बोरवेलों को कंक्रीट या धातु के मजबूत ढक्कनों से सील किया जाए तथा उनका नियमित निरीक्षण किया जाए। सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी तथा जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि खुले बोरवेल गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं, इसलिए इनके प्रति जनजागरूकता बढ़ाने हेतु विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि ऐसे खुले बोरवेल की तत्काल सूचना प्रशासन को दें। प्रशासन द्वारा इन सभी स्थलों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोका जा सके।कुओं/बावडियों की मुंढेर उंची की जाए-इसके साथ ही मंदसौर जिले में स्थित सभी निजी एवं सार्वजनिक उपयोग के खुले कुएं, कुइयां, प्राचीन बावड़ियां तथा सड़कों व खेतों के रास्तों के किनारे स्थित बिना मुंडेर वाले कुओं को लोहे की मजबूत जाली से ढंकने के निर्देश दिए गए हैं। इनकी मुंडेर इतनी ऊंची बनाई जाए कि कोई जानवर, बच्चा या व्यक्ति उसमें गिर न सके।बोरवेल को लेकर ये हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश-सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार खुले बोरवेल को बंद करना अनिवार्य है, ताकि जानलेवा हादसे रोके जा सकें। इसके साथ ही बोरवेल खोदने के बाद, उसके केसिंग पाइप को जमीन से 0.30 मीटर ऊपर तक कांक्रीट के प्लेटफॉर्म से ढका जाना चाहिए। जो कि घटनास्थल पर नहीं देखा गया।-नलकूप की खुदाई करने वाली सरकारी संस्था, अर्ध-सरकारी संस्था या ठेकेदार का पंजीयन जिला प्रशासन या संबंधित सक्षम अधिकारी के कार्यालय में होना चाहिए।
- जिस स्थान पर नलकूप की खुदाई की जा रही है, उस स्थान पर साइन बोर्ड लगाया जाना चाहिए। साइन बोर्ड में नलकूप खोदने या उसके पुनर्वास करने वाली एजेंसी का पूरा पता और नलकूप के मालिक या उसे काम में लाने वाली एजेंसी का विवरण दर्ज होगा।
- नलकूप की खुदाई के दौरान उसके आसपास कंटीले तारों की फेंसिंग या अन्य उपयुक्त व्यवस्था की जाना चाहिए।
- नलकूप के बनने के बाद उसके केसिंग पाइप के चारों तरफ सीमेंट/कॉन्क्रीट का प्लेटफार्म बनाया जाएगा। इसकी ऊंचाई 0.30 मीटर होनी चाहिए। प्लेटफार्म जमीन में 0.30 मीटर गहराई तक बनाना होगा।
- केसिंग पाइप के मुंह के पर स्टील की प्लेट वेल्ड की जाएगी या नट-बोल्ट से अच्छी तरह कसा होगी। इस व्यवस्था का मकसद नलकूप के मुंह के खुले रहने के कारण होने वाले संभावित खतरों से बच्चों को बचाना है। पम्प रिपेयर के समय नलकूप के मुंह को बंद रखा जाएगा।
- नलकूप की खुदाई पूरी होने के बाद खोदे गए गड्ढे और पानी वाले मार्ग को समतल किया जाएगा।
- यदि किसी कारणवश नलकूप को अधूरा छोड़ना पड़ता है तो उसे मिट्टी, रेत, बजरी, बोल्डर या खुदाई में बाहर निकले चट्टानों के बारीक टुकड़ों से पूरी तरह जमीन की सतह तक भरा जाना चाहिए। नलकूप की खुदाई पूरी होने के बाद साइट की पुरानी स्थिति को बहाल किया जाना चाहिए।